हमीदिया अस्पताल में फिर बनेगा अलग जेल वार्ड, बंदियों की सुरक्षा और इलाज पर रहेगा फोकस
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में प्रदेशभर से इलाज के लिए आने वाले गंभीर बंदियों के लिए फिर से अलग जेल वार्ड बनाने की तैयारी है। हाल में बंदी के फरार होने की घटना के बाद जेल विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।
भोपाल। हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गंभीर बंदियों की सुरक्षा को लेकर जेल विभाग ने एक बार फिर अलग जेल वार्ड बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेशभर की जेलों से इलाज के लिए भोपाल रेफर किए जाने वाले गंभीर बंदियों को इस सुरक्षित वार्ड में रखने की योजना है।
अलग जेल वार्ड बनने से बंदियों के इलाज के साथ उनकी निगरानी व्यवस्था भी मजबूत होगी। हालांकि, बंदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता जेल विभाग के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बंदियों के लिए बनेगा अलग सुरक्षित वार्ड
जेल विभाग हमीदिया अस्पताल में अलग जेल वार्ड स्थापित करने की तैयारी में जुटा है। इस वार्ड में प्रदेश की अलग-अलग जेलों से गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भोपाल लाए जाने वाले बंदियों को रखा जाएगा।
अलग वार्ड होने से अस्पताल के सामान्य मरीजों से बंदियों को अलग रखने के साथ उनकी सुरक्षा और निगरानी पर भी ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा।
बंदी के फरार होने के बाद बढ़ी चिंता
हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए एक बंदी के मौका पाकर फरार होने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इसी तरह की घटनाओं को देखते हुए जेल विभाग अब व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
जेल प्रशासन का फोकस गंभीर बंदियों को इलाज उपलब्ध कराने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
पुलिस बल की कमी बनी चुनौती
बंदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की जरूरत होती है। हमीदिया अस्पताल में अलग जेल वार्ड बनाने की योजना के साथ सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था करना भी चुनौती है।
जेल विभाग की कोशिश है कि अस्पताल में इलाज के दौरान बंदियों की निगरानी मजबूत रहे और किसी भी तरह की सुरक्षा चूक को रोका जा सके।
हाल की घटनाओं के बाद व्यवस्था में बदलाव
हाल में सामने आई घटनाओं के बाद जेल प्रशासन अस्पतालों में बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। इसी कड़ी में हमीदिया अस्पताल में अलग जेल वार्ड स्थापित करने की कवायद तेज की गई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर रूप से बीमार बंदियों को बेहतर इलाज के साथ सुरक्षित माहौल देने की कोशिश होगी।
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